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सौभाग्य और समृद्धि बढ़ाने वाला वट सावित्री व्रत



05 June Vadodara : हिंदू धर्म में पति की दीर्घायु के लिए पत्नियां बहुत से व्रत रखती हैं, इन्‍हीं में से एक है वट सावित्री व्रत। इस दिन महिलाएं बरगद के पेड़ के चारों तरफ पूजा करती हैं और परिक्रमा करती हैं। इस बार यह तिथि 22 मई को यानी आज है और इसी दिन शनि जयंती भी मनाई जा रही है। इस दिन सभी सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार कर बरगद के पेड़ की पूजा करती हैं।


वट सावित्री के व्रत में पुराने समय ये बरगद के पेड़ की पूजा करने की परंपरा चली आ रही है। इससे भी एक पौराणिक कथा जुड़ी है। बताया जाता है कि वट के वृक्ष ने ही अपनी जटाओं में सावित्री के पति सत्‍यवान के मृत शरीर को अपनी जटाओं के घेरे में सुरक्षित रखा था ताकि कोई उसे नुकसान न पहुंचा सके। इसलिए वट सावित्री के व्रत में काफी समय से बरगद के पेड़ की पूजा होती आ रही है। ज्‍योतिषियों के अनुसार, वट के वृक्ष में ब्रह्मा, विष्‍णु और महेश तीनों का वास होता है, इसलिए इ‍सकी पूजा करने से पति की दीर्घायु के साथ ही उत्‍तम स्‍वास्‍थ्‍य की प्राप्ति होती है।


आज वट सावित्री व्रत है और इस व्रत को विवाहित महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुख समृद्धि के लिए करती है।इन दिनों मंदिर तो बंद है लेकिन फिर भी मंदिर के बाहर महिलाओं ने सज धज कर वट वृक्ष की पूजा की करते हुए मंगल कामना की।गोत्री में महिलाओं ने बड़ी संख्या में एकत्रित होकर वट की पूजा करते हुए पति की लंबी आयु की कामना की। विवाहित महिलाओं ने सोलह श्रृंगार कर पति की लंबी आयु की कामना तो कर ली, लेकिन खुद की लंबी आयु और सुरक्षा के लिए फिलहाल आवश्यक माना जा रहा मास्क यहां नदारद दिखा। श्रद्धा और भक्ति से परिपूर्ण महिलाएं मास्क तो भूली ही सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन नहीं हुआ।


सोमा तालाब के हनुमान टेकरी इलाके में भी महिलाओं ने श्रद्धा के साथ वट सावित्री व्रत की पूजा की। मंदिर बंद होने की वजह से बिना पुजारी के ही महिलाएं पूजा करती हुई दिखाई दी। भक्ति भाव से महिलाओं ने पूजा तो कर ली लेकिन यहाँ भी कोरोना संक्रमण का डर कहीं पीछे छूट गया।सुंदर परिधानों में सज्ज महिलाओं ने मास्क पहनना तक जरूरी नहीं समझा, ऐसे में कोरोना संक्रमण का खतरा कुछ और बढ़ जाता है।

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