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छत्रपति शिवाजी महाराज की गाथा

छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती महाराष्ट्र का प्रसिद्ध उत्सव है। 19 फरवरी को शिवाजी जयंती धूम-धाम से मनाई जाती है | भारत के वीर सपूतों में से एक शिवाजी महाराज को कुछ लोग हिंदू हृदय सम्राट कहते हैं तो कुछ लोग इन्हें मराठा गौरव कहते हैं. उनका जन्म 19 फरवरी 1630 में हुआ था.शिवाजी न सिर्फ एक महान शासक थे बल्कि दयालु योद्धा भी थे.


जानें उनके बारे में ये खास बातें.

जिस समय शिवाजी ने हिन्दू साम्राज्य की स्थापना की थी उस समय इस धरती का सबसे क्रूर व् बदनाम बादशाह दिल्ली के तख़्त पर बैठा हुआ था | लेकिन इन सब के बावजूद छत्रपति शिवाजी अपने सिद्धांतों से ना कभी डगे ना कभी झुके | सन 1627 ई. पूरे भारत पर मुग़ल साम्राज्य का आधिपत्य था | उत्तर में शाहजहाँ तो बीजापुर में सुल्तान मोहम्मद आदिल शाह और गोलकुंडा में सुल्तान अब्दुल्ला क़ुतुब शाह | डेक्कन के सुल्तान सेना के लिए हमेशा मुस्लिम अफसरों को ही प्राथमिकता देते थे, पर दरगाहों पर पुर्तगालियों का कब्ज़ा था | और धन्मार्ग पर मुगलों का अधिकार इसलिए उत्तरी अफ्रीका और मध्य एशिया से मुसलमान अधिकारियों को ला पाना मुमकिन नहीं था और डेक्कन के सुल्तानों को हिन्दू अधिकारी नियुक्त करने पड़ते थे | आदिल शाह की सेना में एक मराठा सेनाध्यक्ष शाहजी भोसले था | शाहजी सेना में उच्च पद पर आसीन था | सन 1630 में महाराष्ट्र में जुन्नर के समीप शिवनेरी के किले में उनके और जिजाबाई के यहाँ एक पुत्र का जन्म हुआ | स्थानीय देवी शिवाए के नाम पर पुत्र का नामकरण हुआ | जो आगे चलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम से विश्वविख्यात हुए |

दादोजी ने उन्हें युद्ध कौशल और निति-शास्त्र सिखाया तो जीजा माता ने हिन्दू धार्मिक कथाएँ | जब दादोजी का सन 1647 में निधन हुआ तब उनका यह मानना था कि शिवाजी अपनी पिता की तरह ही आदिल शाह की सेना में उच्च पद पर आसीन होंगे | लेकिन विधि को कुछ और ही मंजूर था |


ये परिस्थितियाँ शिवाजी के लिए 1646 में अनुकूल बनी जब उन्होंने स्थानीय किसानों के समर्थन से सेना का निर्माण किया | किसी भी साम्राज्य की स्थापना के लिए किले का महत्व शिवाजी को अच्छी-तरह से मालूम था | इसलिए सिर्फ 15 साल की उम्र में ही उन्होंने आदिलशाही अधिकारियों को रिश्वत देकर तोरण, चाकन, और कोंडन किलों को अपने अधिकार में कर लिया | इसके बाद उन्होंने आबाजी सोंदेव की मदद से थाना, कल्याण, भिवंडी के किलों को मुल्ला एहमद से छिनकर अपने अधिकार में कर लिया | इन सभी घटनाओं से आदिलशाही साम्राज्यों में हडकंप मच गया | शिवाजी को रोकने के लिए उनके पिता को गिरफ्तार कर लिया इसलिए शिवाजी ने अगले सात वर्ष तक आदिलशाह पर कोई सीधा आक्रमण नहीं किया | शिवाजी ने यह समय अपनी सेना को बढाने और प्रभावशाली देश्मुखों को अपनी ओर करने में लगाया | अब तक शिवाजी के पास 40 किले भी आ चुके थे | शिवाजी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सन 1659 में बीजापुर की बदिशाहिबा ने अफज़ल खान को 10,000 सिपाहीयों के साथ शिवाजी पर आक्रमण करने का हुक्म दिया | अफज़ल खान अपनी ताकत और क्रूरता के लिए जाना जाता था | उसने शिवाजी को खुले युद्ध करने के लिए उकसाने की कई कोशिशे की किन्तु नाकाम रहा | लेकिन शिवाजी ने चतुराई का प्रयोग करते हुए छापामार पद्धति से युद्ध चालू रखा | अफज़ल खान ने शिवजी को मिलने का न्योता जिससे की वह शिवाजी को मार सके परन्तु शिवाजी पहले से ही तैयार थे उन्होंने अपने छुपाकर रखे बाघनाका से उसका पेट ही चीर दिया | इसके बाद शिवाजी ने प्रतापगढ़ में अफज़ल खान की सेना को हरा दिया, इससे बीजापुर का सुल्तान भी चौक गया | 28 दिसम्बर सन 1659 में शिवाजी ने रुस्तम ज़मान की सेना को भी हरा दिया | सन 1660 में आदिलशाह ने अपनी सेना में से सिद्दी जोहर को हमला करने का हुक्म दिया | शिवजी को बचाने में उनके एक सैनिक देशपांडे ने अपना बलिदान दे दिया |


वीर शिवाजी की कथाओं में इतना असर है कि आज भी जब भारत के किसी घर में कोई महिला गर्भवती होती है तो उसकी मां और सास उस महिला से कहती है कि वो छत्रपति शिवाजी की कहानियां पढकर अपने गर्भ में पल रहे शिशु को सुनाए, जिससे आने वाला बच्चा उन्हीं की तरह बहादुर पैदा हो।

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