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देखिए जीवन शैली किस तरह जीवन को अच्छा या बुरा बनाती है



आज धीरू मिस्त्री के यादों के पिटारे में बात है राजपिपला के राजकुमार करमजीतसिंह के बारे में।

धीरू मिस्त्री राजकुमार के बारे में बताते है कि ,

राजकुमार करमजीतसिंह का जीवन आलीशान था। लेकिन इस राजकुमार के लिए 40 और 50 के दशक का दृश्य अलग था। कयूकी धीरे-धीरे उनकी बुरी आदतें बढ़ती गई और वह बर्बाद होते गए। उनकी पीने की आदतों ने उनकी आर्थिक स्थिति को नष्ट कर दिया।

जिसके बाद वह अस्पताल में भर्ती करवा दिए गए। जब हमने यह सुना कि वह सिविल अस्पताल, राजपीपला में भर्ती है तब में और उनके भाई सुरेशवरसिंह उन्हें देखने गए।

"करमजीतसिंह कहाँ है?," हमने नर्स से पूछा।

"वहाँ है, उनमें से बदबू आ रही है।" नर्स ने बिस्तर पर पड़े करमजीत की ओर इशारा करते हुए कहा।

यह देखकर मुझे बहुत अफ़सोस हुआ और उसे ऐसी हालत में देख मुझे याद आया कि वह खाली बोतलें मेरी ओर फेंक कर मुझे गाली देते हुए बोलता था, "तुम, चोलता।"



दरअसल मैं बढ़ई समुदाय से हु और बढई समुदाय में इस शब्द का आमतौर पर इस्तेमाल नही किया जाता। इस शब्द का इस्तेमाल तभी किया जाता है अगर आप किसी का अपमान करना चाहते है।

उसके बाद हम उस नर्स को अस्पताल में रखी उस तख्ती तक ले गए, जिस पर 'राजपीपला के महाराणा चट्टसिंहजी की स्मृति में निर्मित सिविल अस्पताल' ऐसा लिखा हुआ था। हमने उससे कहाँ की, "बहन, यह आदमी महाराजा का पोता है, जिसकी याद में यह अस्पताल बनाया गया है।"

यह सुनकर पहले तो बेचारी नर्स को पता नहीं चला क्या कहना था।

यही जीवन है। यह जीवन अच्छा भी हो सकता है और बुरा भी। लेकिन जीवन का अच्छा या बुरा होना यह केवल आपके जीवन जीने की शैली पर निर्भर है। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि आप खुद ही अपनी कब्र खोदते हैं। करमजीतसिंह ने भी हमारी चेतावनियों के बावजूद परेशानी को आमंत्रित किया और अपने आप को बर्बाद किया।


धीरू मिस्री - यादों का पिटारा