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लोक डाउन की वजह से सड़क दुर्घटनाए थमी....कोरोना से मौत के आंकड़े सड़क हादसों से मौत के आंकड़ो से कम



कोरोना वैसे तो बहोत ही गंभीर बीमारी है। कोरोना वायरस के कहर से विश्वभर में अब तक लाखों लोगों की मौत हो चुकी है। वही भारत में भी इस संक्रमण से हजारों लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन अभी भी भारत में कोरोना की वजह से उतनी मौतें नहीं हुई है जितनी रोजाना सड़क हादसों से होती थी। अब तक हमने देखा है कि लोक डाउन की जो सकारात्मक असर है उस असर से पर्यावरण में शुद्धि हुई है, प्रदूषण कम हुआ है। लेकिन जो अहम फायदा इस लोक डाउन की वजह से देश को हुआ है वो सड़क हादसों का खत्म हो जाना। इस फायदे पर तो अब तक किसी ने ध्यान ही नही दिया। इस वक्त जहाँ सब कुछ बंद है लोगों को घर से बाहर निकलने की जरूरत भी नही है। इस वक्त अगर कोई घर से बाहर निकलता भी है तो सिर्फ जरूरी चीजें लेने के लिए। इसके अलावा वाहन व्यवहार काफ़ी हद तक बंद ही है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार भारत में हर साल साढ़े चार लाख से अधिक सड़क हादसे होते है।जिसमे तकरीबन डेढ़ लाख लोग मारे जाते हैं। वर्ष 2018 में 467044 सड़क दुर्घटनाओं में 151417 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।दैनिक आधार पर देखा जाए तो ये आंकड़ा 1279 सड़क हादसों और 414 मौतों का बनता है। उसी तरह विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, पूरी दुनिया में सड़क दुर्घटनाओं में हर रोज तकरीबन 3700 लोगों की मृत्यु होती है। भारत में अब तक कोरोना से मौत के जो आंकड़े सामने आए है वो सालाना हो रहे सड़क हादसे के आंकड़ो से काफ़ी ज्यादा कम है। विश्व के लिए बहोत ही बड़ी मुसीबत है जिसमें उनके कई नागरिकों की मौत हो रही है। लेकिन भारत देश में ये आंकड़े हादसों से होनेवाली मौत के आंकडो से कम है।

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