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40 साल पुरानी मिट्टी से राजमहल के श्रीजी का निर्माण


Photo By Bharat Rajput

04 June Vadodara : कोरोना वायरस और कोरोनावायरस से हुई तालाबंदी ने हर क्षेत्र पर अपना प्रभाव डाला है, और गणेश महोत्सव भी इससे अछूता नहीं है। यूँ तो गणेश महोत्सव के महीनों पहले गणेश प्रतिमा बनाने का काम शुरू हो जाता है, लेकिन इस वर्ष फैली महामारी के चलते गणेश महोत्सव मनाने को लेकर लोगों में असमंजस का माहौल है।इस असमंजस के बीच भी वड़ोदरा में पारंपरिक रूप से हर वर्ष राजमहल में विराजमान होने वाले गणपति का निर्माण शुरू कर दिया गया है।


इस प्रतिमा का निर्माण मूर्ति बनाने वाले कलाकार कृष्णराव बारीकराव चौहाण ने वर्ष 1926 में पहली बार किया था। जो राज महल में स्थापित हुई और उसके बाद 9 दशकों तक चौहाण और उनके वंशजों द्वारा बनाई गई प्रतिमा ही राजमहल में स्थापित करने की परंपरा है। वर्तमान में चौहाण परिवार की तीसरी पीढ़ी लालसिंह राव चौहाण, मानसिंह चौहाण और प्रदीप चौहाण खंडेराव मार्केट चार रस्ता के पास लिंबाच माता मंदिर निकट मिट्टी की प्रतिमाएं बनाते हैं। इस वर्ष तालाबंदी की वजह से भावनगर से ग्रे मिट्टी नहीं आ पाई है, लेकिन 40 साल पुरानी मिट्टी से 400 प्रतिमाएं तैयार की जा रही है,जिसमें राजमहल के श्रीजी की प्रतिमा भी शामिल है।

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