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2018 के बाद देश में सम्पन्न सभी चुनाव के परिणामों का लोकतन्त्र के लिए स्पष्ट और सकारात्मक संदेश


Vadodara 11 Feb: संभवत:पूरे भारत में आज अधिकांश ड्राइंग रुमों अथवा अॉफिसों में टी.वी. सेट ऑन होंगे और निगाहे जमी होगी टीवी स्क्रीन पर |वजी हां, आज जिसका बेसब्री से लम्बे समय से इन्तजार था वह रोमांच से भरपूर दिन जो है |

अर्थात् दिल्ली विधान सभा चुनावों के परिणाम का दिन |

परिणाम आज घोषित हो रहे मगर जो आ रहे हैं, ठीक वैसे हैं जो 8 फेब्रुअरी की शाम से आ रहे विभिन्न एक्जीट पोल दिखा रहे थे |ओर तो ओर विभिन्न दलों को मिलने वाली सीटों के आंकड़े भी उन्नीस बीस के अंतर के साथ ज्यों के त्यों है |

नतीजे सुनते सुनते ही आम भारतीय के जेहन में यही चल रहा है की एैसा क्यों ?

एक वर्ष पहले ही सम्पन्न लोकसभा चुनाओं में दिल्ली की सातों लोकसभा सीट पर भाजपा की ज्वलन्त जीत हुई थी याने 90 प्रतिशत विधान सभाओ में भाजपा आगे रही थी और यही कारण था की आम जन 2020 के चुनाओं के बाद दिल्ली विधान सभा से केजरीवाल की दयनीय विदाई निश्चित मान कर चल रहे था |

मगर भजपा की विजय श्री को अपरिहार्य मान कर चल रहे जन 2018 में तीन राज्यों राजस्थान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सम्पन्न विधान सभा चुनाओं के परिणाम और इन्ही राज्यों में 2019 में सम्पन्न लोकसभा चुनाओं के परिणामों के अंतर को विस्मृत कर बैठे |

यह सभी परिणाम सिर्फ एक ही बात पुरी ताकत से कह रहे हैं की भारतीय मत दाता बहुत परिपक्व हो गया है |वह अब देश, राज्यों और नगर, जिला या गांवों में फर्क करना सिख गया है | लालच, सम्प्रदाय , धर्म के नाम पर उसे भावुक बना कर वोट नहीं लिया जा सकता | वह जानता समझता है की देश और उसके हितों की हिफाजत कौन कर सकता है जबकी |प्रजा के हित सीधे सीधे राज्य सरकार या स्थानीय प्रशासन से जुड़े रहते हैं और यही संस्थाए उनकी समस्याएं का समाधान करती है या कर सकती है |

और इसीलिए तीनों चुनाओं के लिए प्रजा के माप दंड अलग अलग रहते हैं | और इसी मानसिकता के साथ आम जन अर्थात् वोटर इ.वी.एम. के बटन दबाना सीख गया है |

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